Thursday, 16 July 2015

युवा क्रांति के बढ़ते कदम : किसान आन्दोलन की नीवं

देश के किसानो की ज़मीन छीनने वालों से सावधान !

हिन्दुस्तान के इतिहास में पहली बार किसी कनून को न बनने देने के लिए संसद से सड़क तक बहस और प्रदर्शन हो रहे हैं और हो भी क्यों न ? ये काला कानून भारतीय किसानो की ज़मीन का स्वामित्व झूठे विकास के नाम पर विदेशी ताकतों के नाम करने का फरमान जारी कर रहा है | इस देश में ज़मीन कभी भी खरीद फरोख्त की चीज नहीं  रही ; बल्कि सभी प्राकृतिक संसाधनों जैसे ज़मीन, पानी, वायु, वनस्पति आदि पर किसी भी व्यक्ति, राजा, प्रजा, समूह, या समाज का स्वामित्व का हक स्थापित नहीं था बल्कि जिस प्रदेश में जो – जो प्रजा रह रही है, वह अपनी आजीविका के लिए व अपनी जरूरतों के लिए उस प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों का आवश्यकतानुसार उपयोग कर सकती थी परन्तु अंग्रेजों ने आने के बाद अपनी कुटिल चालों से न केवल हमारी समाज व्यवस्था को तोड़ दिया बल्कि ज़मीन का स्वामित्व भी 1894 के भूमि अधिग्रहण बिल द्वारा छीनने का काम शुरू किया | तथाकथित झूठी आज़ादी के बाद जब अंग्रेजों ने अपने ही नुमाइंदों को प्रजातंत्र के नाम पर शासन करने के लिए बिठाया तो जिस देश में कृषि और गाँव अर्थव्यवस्था के मूल में थे उसी देश के किसानो को बर्बाद करने के लिए गहरे षड्यंत्र रचे गए, जिससे वो अपनी ज़मीनों को बेचने के लिए मजबूर हो जाये, एक तरफ ट्रेक्टर के नाम पर कर्ज बांटे गए, ज़मीन को अनुपजाउ बनाने के लिए भारी मात्र में सब्सिडी देकर फर्टिलाईजर्स लाये गए वहीँ दूसरी ओर मोनसेंटो जैसी कम्पनियों के बल पर बीज का स्वामित्व भी किसानो से छीन लिया और ऐसे  में जब किसानो को उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलता, अनाज और चावल मंडियों में सड जाता है तो किसान कर्ज के जाल में फंसकर आत्महत्या करता है | ऐसे में सरकार भी कहती है की खेती घाटे का सौदा है इसे छोड़ दो हम यहाँ उद्योग लगायेंगे और आपको रोजगार देंगे | जिस देश में हजारों लाखों सालों से कृषि मूल में रही आजीविका का साधन रही आज इन्होने षड्यंत्रों से इसे किसान के लिए घाटे का सौदा बना दिया | फिर भी देखिये किसान कितनी मेहनत करता है जहाँ आज पूरे देश की जरुरत 70 लाख टन गेहूं की है वहीँ 90 लाख टन गेहूं की उपज इस साल पैदा की है लेकिन फिर भी सरकार ने मक्कारी दिखाते हुए आस्ट्रेलिया से 10 लाख टन गेहूं की खरीददारी कर किसानो की फसलों को मंडियों में सड़ने के लिए मजबूर कर दिया |
इतना होने पर भी विदेशी व देशी ताकतों को सब्र नहीं है और उन्होंने देश के प्रधानमंत्री से कहा की आप जल्दी से ऐसा कानून बनाओ जिससे की हम  जलदी से ज़मीन छीन सकें | जैसे की हमने ऊपर बताया की अंग्रेजों ने 1894 में भूमि - अधिग्रहित करने के लिए एक खतरनाक कानून बनाया था | तथाकथित आज़ादी के बाद जब 1991 में वैश्वीकरण हुआ तो उसके बाद इस कानून के दम पर बड़े पैमाने पर देश में ज़मीन अधिग्रहण शुरू हुआ | कांग्रेस के कार्यकाल में ( SEZ – Special Economic Zone ) के नाम लाखों हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई और इसकी ज्यादातर ज़मीन आज भी ऐसे ही पड़ी है | जब पूरे देश में आवाज उठी, संघर्ष चले, किसानो ने सहादते दी तो कांग्रेस ने जाते जाते 2013 में नया भूमि अधिग्रहण कानून बनाया जिसपर भाजपा के सुषमा स्वराज से लेकर राजनाथ सिंह तक सभी नेताओं कि सहमती थी | 2014 में भाजपा की सरकार आने के बाद दिवंगत गोपीनाथ मुंडे ने कहा था की जल्द ही  उनकी सरकार इस 2013 के बिल को लागु करेगी क्यूंकि ये किसानो के हित में है लेकिन उनके इस ब्यान के कुछ दिन बाद ही एक सड़क दुर्घटना में उनकी रहस्मयी मौत हो गयी | उसके बाद नितिन गडकरी जी ने कहा की ये कानून उनकी सरकार लागू नहीं करेगी और एक नया कानून लेकर आएगी जिसके माध्यम से देश का विकास होगा |
2015 की शुरुआत में जहाँ एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति हिन्दुस्तान के दौरे पर थे वहीँ दूसरी तरफ मोदी सरकार उनके स्वागत में देश में विकास के नाम पर किसानो को बर्बाद करने का काला कानून बनाने के लिए अध्यादेश जारी करती है | युवा क्रांति के साथियों ने न केवल अमेरिका के सरगना का विरोध करने की ठानी बल्कि झूठे विकास के नाम पर किसानो को बर्बाद करने वाले अध्यादेश के खिलाफ लड़ने का ऐलान किया | 24 जनवरी को “अमेरिका का डॉलर राज और ओबामा की भारत यात्रा” नामक एक गोष्ठी  गाँधी शांति प्रतिष्ठान में निर्धारित हुई | इसकी तैयारियों के दौरान २२ जनवरी की रात को मैं और मेरे ३ साथी जंतर – मंतर पर “ओबामा –गो बैक” के पोस्टर लगाते हुए दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये गए  | २ दिन तक पुलिस हिरासत में ख़ुफ़िया विभाग और पुलिस के आला अधिकारियों द्वारा पूछताछ चलती रही फिर टीम अन्ना के सदस्य डॉ. राकेश रफ़ीक और अक्षय कुमार के आने के बाद रिहा किया गया | लेकिन इस घटना के बावजूद 24 जनवरी का हमारा कार्यक्रम सफल रहा | इस कार्यक्रम में न केवल समाजसेविका मेधा पाठकर आकर हमारे साथ शामिल हुई बल्कि किसान नेता सरदार वी एम सिंह और चौधरी हरपाल सिंह सहित कई  किसान नेता भी शमिल हुए | युवा क्रांति के संयोजक रवि कोहाड़ ने अपनी प्रेजेंटेशन में बताया की किस तरह अमेरिका की नीतियों से आज हमारा किसान बर्बादी की ओर है | युवाओं ने भी अपने विचार रखे और इस अध्यादेश के हर पहलु पर चिंतन हुआ | यहीं से फैसला लिया गया की 30 जनवरी को भगतसिंह पार्क से गाँधी समाधि तक पदयात्रा निकली जाएगी | इस तरह भूमि – अधिग्रहण के खिलाफ दिल्ली में पहला विरोध प्रदर्शन हुआ | जिसमें  लगभग 500 लोग शामिल थे – डॉ. राकेश रफ़ीक, मेधा पाटकर, अरुणा रॉय, कविता कृष्णन, सरदार वी एम सिंह, चौधरी हरपाल सिंह, योगेंदर यादव और युवाओं का नेतृत्व करते हुए युवा क्रांति के संयोजक रवि कोहाड़ | पद यात्रा के बाद गाँधी समाधि पर ही चिंतन हुआ और तय किया गया की संसद शुरू होते ही 24 फ़रवरी को एक विशाल धरना प्रदर्शन संसद के सामने किया जाये | यहाँ से शुरू हुआ असली खेल जहाँ एक तरफ चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के किसान आन्दोलन के प्रमुख नेता डॉ. राकेश रफ़ीक के नेत्रत्व में हम किसान नेताओं से मिल रहे थे वहीँ सत्ता द्वारा हमारी शक्ति को नष्ट करने के षड़यंत्र रचे जा रहे थे |
सर्वप्रथम हम किसान यूनियन के नेता चौधरी हरपाल सिंह जी के साथ जाकर बीकेयू के नेता चौधरी राकेश टिकैत से मिले की किसानो की लड़ाई शुरू हो गई है, आप इसका नेतृत्व करें और 24 फ़रवरी को शामिल हो लेकिन उन्होंने कहा की आप अभी करिए हम मार्च महीने में करेंगे | हमने उनको सहमत करने की हरसंभव कोशिश की कि अगर संसद शुरू होते ही एक धरना प्रदर्शन हो तो सरकार दवाव में आ जाएगी लेकिन वो नहीं माने और ये तक कह दिया की अगर बीकेयू का कोई किसान 24 फरवरी को शामिल होगा, तो उसे बीकेयू से बाहर कर दिया जायेगा | उसके बाद में खुद देश में किसानो के सबसे बड़े अर्थशास्त्री कहे जाने वाले डॉ. देवेंदर शर्मा से मिला उन्होंने न केवल इस लड़ाई में पूरा साथ देने का वादा किया बल्कि हरियाणा, पंजाब के कई किसान नेताओं के संपर्क भी दिए | युवा क्रांति की शक्ति सीमित होने के कारण मुझे और हमारे सह- संयोजक साईं हिमांशु तिवारी को किसान आन्दोलन की लड़ाई लड़ने के लिए नियुक्त किया गया | हमने पंजाब के बलवीर सिंह राजेवाल, मंजीत धनेर, दर्शनपाल, हरजिंदर सिंह, दिल्ली/एनसीआर के रावत, सुनील फौजी, मनवीर भाटी, हरियाणा के महावीर गुलिया, गुरुनाम सिंह चंदुनी, सतवीर डागर, सत्यवान, यूपी के अखिलेंदर प्रताप सिंह, हरपाल सिंह, वीएम सिंह, महाराष्ट्र से प्रतिभा शिंदे, चूकी, ओडिशा के अक्षय कुमार, लिंगराज, मध्य प्रदेश के ईश्वरचंद त्रिपाठी, माधुरी बहन, सुनीलम, असाम के अखिल गोगोई, बिहार के अर्जुन सिंह सहित सैंकड़ों किसान संगठनो से मिले और सबको 24 फ़रवरी को एक साथ एक मंच पर ला दिया | जहाँ एक तरफ मेधा पाटकर जी, अरुणा रॉय, पी वी राजगोपाल, कविता कृष्णन शामिल हुए वहीँ वहीँ कुछ राजनैतिक पार्टियों के किसान फ्रंट को साथ जोड़ने से भी मजबूती मिली जैसे जय  किसान अभियान के योगेंदर यादव और अखिल भारतीय किसान संगठन के अतुल अनजान और हनान मोला | 
किसान नेताओं को एक मंच पर आने में उनके अहम् का टकराव आ रहा था इसलिए एक नेतृत्व की समस्या सामने आ गई | इस समस्या का समाधान हमारे मार्गदर्शक और अन्ना कोर कमेटी के सदस्य रहे जो इस आन्दोलन के केंद्र बिंदु भी हैं डॉ. राकेश रफ़ीक, जिन्होंने अन्ना जी को आह्वान किया की आप किसानो की इस लड़ाई को मजबूती देने के लिए 24 फ़रवरी को किसानो के मंच पर शामिल हो जाओ | उनको लगातार युवा क्रांति के कार्यालय से सम्पर्क करके समझाया गया की कैसे ये कानून न केवल किसानो को बर्बाद करने के लिए अपितु देश को बर्बाद करने के लिए है | जैसे ही उन्होंने अपने आने की सहमती मीडिया को दी उनको रोकने के लिए बहुत सारी ताकत लगा दी गई | एक तरफ पी. वी. राजगोपाल जी ने अन्ना जी को सहमत किया कि आप 19 फ़रवरी को जो 5000 मजदूर किसान पलवल से चलेंगे उनको हरी झंडी दिखाइए और वो 24 फ़रवरी को पैदल यात्रा करते हुए दिल्ली जंतर मंतर पर किसानो से जा मिलेंगे लेकिन अन्ना जी के यात्रा को हरी झंडी दिखने के बावजूद कुछ ताकतों ने इस काफिले को 24 फरवरी को संसद मार्ग पर किसानो के धरना प्रदर्शन में नहीं पहुँचने दिया | वहीँ अन्ना जी के चारों ओर एक जाल बिछाया गया और अन्ना के ही कुछ साथियों ने सत्ता के दबाव में 24 फ़रवरी के कार्यक्रम को विफल बनाने के लिए 23 फ़रवरी को जंतर – मंतर पर अन्ना जी के ही कुछ समर्थकों द्वारा भ्रष्टाचार विरोधी बैनर तले विरोध प्रदर्शन रख दिया और अन्ना जी को कहा की यहीं सब किसान शामिल होंगे क्यूंकि वहीँ पर 23 फ़रवरी को कोंग्रेस का भी प्रदर्शन होना था और उनका अनुमान था की यही भीड़ अन्ना जी के वहां दिखाकर एक कार्यक्रम कर देंगे लेकिन कोंग्रेस ने अपना प्रदर्शन रद्द कर दिया और अन्ना समर्थकों का ये प्रदर्शन 23 फ़रवरी को कम भीड़ होने के कारण फीका ही रहा जो की एक शाजिस के तहत था | लेकिन अन्ना जी को समझ आ गया और वो 24 फ़रवरी को पूरा दिन संसद मार्ग पर किसानो के मंच पर रहे लेकिन फिर भी वो तथाकथित अन्ना समर्थक काफी किसानो को अन्ना जी के 23 फ़रवरी वाले मंच पर जोकि जंतर मंतर पर था बरगालाते रहे की जल्दी ही अन्ना जी यहाँ आयेंगे | हमारे इस मोर्चे के एक मजबूत किसान नेता सरदार वी एम सिंह ने भी कुछ दवाबों में जंतर – मंतर पर 24 फ़रवरी को अलग से मंच लगा दिया जबकि कई बार उनके घर जाकर हमने उनसे अपील कि थी ये किसानो की  लड़ाई एक साथ लड़नी है | इतने सब षडयंत्रों के बावजूद 24 फ़रवरी इस लड़ाई का एक अहम् बिंदु बना और 25 से 30 हज़ार किसानो की भीड़ उस दिन संसद मार्ग पर थी वहीँ मंच पर देश के तमाम किसान नेता मोजूद थे | जैसा की पहले से निर्धारित था किसी राजनैतिक पार्टी के नेता को मंच पर स्थान नहीं मिलेगा और अगर कोई नेता आता है तो वो ज़मीन पर किसानो के साथ बैठेगा तो जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल समर्थन देने आये तो युवा क्रांति के वोलेंटीयर्स ने उन्हें मंच पर नहीं चढने दिया | उनका मंच पर आने का जूनून इस कदर था की दो बार जब उन्हें सीढियों से मंच पर नहीं चढने दिया तो 7 फीट ऊँचे मंच पर नीचे से आम –आदमी पार्टी के विधायकों ने उन्हें उठाकर अमान्य तरीके से मंच पर चढ़ाया | इस पर युवा क्रांति के नौजवान बेकाबू हुए और उन्हें मंच से फेंकने की और चल दिए लेकिन मंच का संचालन कर रहे युवा क्रांति के मार्गदर्शक डॉ. राकेश रफ़ीक ने हमको रोका की इनका इस तरह मंच पर चढ़ना बिलकुल गलत है लेकिन अब एक राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर उन्हें मंच पर रहने दो | लेकिन मीडिया ने इस घटना को बिलकुल अलग तरीके से दिखाया | इस प्रदर्शन ने मोदी सरकार के सीने में कील ठोंक दी और फिर सभी पार्टियाँ अपने राजनैतिक हितों की पूर्ती के लिए मैदान में आ गयी |
इस आन्दोलन को जमीनी स्तर पर ले जाने और मजबूती देने के लिए युवा क्रांति  ने अन्ना जी की 4 सभाएं दिल्ली के चारों ओर हरियाणा, पंजाब, यूपी और राजस्थान में 20 से 25 मार्च के बीच निर्धारित करवाई जिनको अन्ना जी ने खुद मिडिया के सामने ब्यान में भी कहा था | लेकिन कुछ NGO के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय ताकतों ने दबाव बनाकर वहीँ महाराष्ट्र से उनकी पदयात्रा का कार्यक्रम बना दिया और फिर बाद में उसे भी रद्द कर दिया ओर अन्ना जी को वहीँ महाराष्ट्र में बिठा दिया | युवा क्रांति के सह – सयोंजक साईं हिमांशु तिवारी ने रालेगन जाकर बहुत विनती अन्ना जी से करी  की वो ये सभाएं स्थगित न करें ये लड़ाई जो इतनी मजबूती से चल रही है वो धीमी पड़ जाएगी और इन साम्राज्यवादी ताकतों के आगे किसान हार जायेंगे लेकिन पता नहीं किस दबाव के चलते वो चुप ही रहे और महाराष्ट्र से निकलने के लिए मना कर दिया | फिर हम खुद युवा क्रांति के नौजवान नेता और देशभर के अन्य किसान नेता जो इस लड़ाई में हमारे साथ जुड़ गए इन निर्धारित तिथियों पर भिवानी ( हरियाणा ), खन्ना ( पंजाब ) और बिलारी (यूपी ) गए और किसानो और युवाओं को इस लड़ाई के लिए जागरूक किया और फिर अन्ना जी का वो स्थान सोनिया गाँधी ने विभिन्न स्थानों पर सभाएं करके अपने पक्ष में खड़ा कर लिया | मोदी सरकार द्वारा लाये गए इस अध्यादेश को उच्चतम न्यायलय में वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह के जरिये जनहित याचिका दायर करके चैलेन्ज किया जिसमें युवा क्रांति की तरफ से मैं और दिल्ली ग्रामीण समाज की तरफ से कर्नल बलहारा और भारतीय किसान यूनियन के नेता भी शामिल रहे |
युवा क्रांति ने सीमित संसाधन और शक्ति होते हुए भी लगातार देश – भर के किसान संगठनो से वार्तालाप करते हुए उन्हें एकजुट करने की अपील की है | जहाँ मोदी सरकार ने भूमि – अधिग्रहण बिल के लिए 30 सांसदों की एक कमेटी का गठन किया, वहीँ हमने 25 मई को दिल्ली में अभी तक इस लड़ाई में शामिल सभी किसान संगठनो को एकत्रित कर एक सभा का आयोजन किया और सर्वसम्मति से “किसान आंदोलनों का राष्ट्रीय ( NAFMNational Alliance of Farmers Movement ) का गठन किया | NAFM के संयोजक मंडल ने जहाँ इन सभी सांसदों के निवास पर जाकर उनको भूमि – अधिग्रहण बिल पर सुझाव पत्र सोंपा वहीँ 15 जून को संसद भवन में इस कमेटी के अध्यक्ष श्री अहलुवालिया सहित पूरी टीम के साथ एक बैठक की और विस्तृत रूप से अपना सुझाव पत्र सोंपा वहां मेने युवाओं को संबोधित करते हुए बोला की भारत सरकार ने पहला मौका आपको दिया है क्यूंकि आप शायद किसानो के बारे में सबसे ज्यादा जानते हैं और ऐसे में हम उम्मीद करते हैं कि आप देश हित और किसान हित में फैसला लेंगे लेकिन अगर आप इस मौके से चूक गए और किसानो के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश की तो फिर दूसरा मौका हम देश के नौजवानों के हाथ में है | और इस बात का खास ख्याल रखें की देश के नौजवानों ने 24 फ़रवरी को सिर्फ एक ट्रेलर आपको दिखाया अगर आप चूके तो फिर पूरी पिच्क्चर चलेगी |
दोस्तों  हमारे साथियों पर लगातार अंतराष्ट्रीय ताकतों द्वारा हमले हो रहे हैं, लेकिन किसी को भी अपनी जान की परवाह नहीं है और आपसे भी ये अपील करते हैं की इस आन्दोलन को मजबूत करें क्यूंकि पूरे देश को बेचने का और किसानी  को समाप्त करने का प्लान ये तैयार कर चुके हैं, अब आपकी ख़ामोशी इसको अमली जामा पहनाने का काम कर रही है | अपनी आवाज को बुलंद करें और इस देश को बर्बाद होने से बचाएं |

जय हिन्द जय किसान | 
लेखक - प्रताप चौधरी 

2 comments:

  1. सभी को नमस्कार,
    आप एक तत्काल ऋण की जरूरत है?
    आप एक ऋण परियोजना की जरूरत है?
    एक घर या एक कार खरीद रहे हो?।
    ऋण ऋण का भुगतान करने के लिए?
    "निवेश ऋण" प्रस्तावों
    आप किसी भी वित्तीय कठिनाई होती है?
    आप बैंकों द्वारा अस्वीकार कर दिया और scammers द्वारा धोखा दिया गया है?
    हम आपकी समस्या का अतीत की बात करने के लिए यहाँ हैं !!
    हमें तुरंत ईमेल, हम 24 घंटे के भीतर तुरंत उपचार की गारंटी।

    हम क्रेडिट 2000-900000 यूरो और पुनर्भुगतान समय के लिए भुगतान की अवधि (1-30 वर्ष) की पेशकश करते हैं।
    संपर्क: leonafrederickloan@gmail.com
              meridian.bank.mail@gmail.com

    हमें चुनने के लिए धन्यवाद ...

    ReplyDelete
  2. नमस्ते,
    इस श्रीमती क्रिस्टी मार्क, एक निजी ऋणदाता ऋण किसी भी वित्तीय मदद की जरूरत में हर किसी के लिए एक वित्तीय अवसर ऊपर खुला है कि आम जनता को सूचित करने के लिए है । हम स्पष्ट और समझने नियम और शर्त ए के तहत व्यक्तियों , कंपनियों और कंपनियों के लिए 2% ब्याज दर पर ऋण दे। पर ई-मेल द्वारा हमें आज से संपर्क करें : ( chrismazzy99@gmail.com )

    ReplyDelete