Thursday, 30 July 2015

साम्राज्यवादी ताकतें

कुछ समय से पूरे विश्व को काबू में करने ले लिए एक नये तरीके का इस्तेमाल साम्राज्यवादियों ताकतों द्वारा किया जा रहा है और वो है लोकतंत्र के नाम पर दूसरे देशो के आंतरिक मामलो में अमरीका व् पश्चिमो देशों का हस्तक्षेप | 1970 तक सी आई ए उन सभी देशों में  सीधे तख्तापलट करने की साजिश रचती थी जो अमरीका की नीतियों का विरोध करते थे लेकिन 1970 के दशक में सी आई ए की ऐसी कई घटनाओं में संलिप्ता दुनिया के सामने उजागर हुई जिन्होंने पूरे अमरीका को शर्मसार कर दिया | इन घटनाओं में प्रमुख थी वाटरगेट स्कैंडल में सी आई ए की भूमिका, 1953 में ईरान में एक लोकतान्त्रिक सरकार का तख्तापलट, 1960 में सी आई ए के आदेश पर कुछ माफियाओं द्वारा क्यूबा के राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो को ज़हर देने की कोशिश और चिली में सी आई ए द्वारा एक लोकतान्त्रिक सरकार के राष्ट्रपति साल्वाडोर अलेंदे की हत्या | इसके बाद अमरीकी सरकार ने निर्णय लिया कि सी आई ए की ऐसी गतिविधियों पर रोक लगा दी जाये और उन्होंने इन कामों को अंजाम देने के लिए 1983 में एक नया संगठन बनाया और उसको नाम दिया गया “नेशनल एन्दोवमेंट फॉर डेमोक्रेसी” और इसको कानून में बदला अमरीकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने | आज के दिन अमरीकी नीतियों का विरोध करने वालों देशों में अव्यव्स्था फ़ैलाने का ज़िम्मा इसी संगठन के ऊपर है | सी आई ए के बारे में तो शायद हर कोई जनता है लेकिन इस संगठन के बारे में बहुत ही कम लोगों ने सुना है और इसी लिए इसके बारे में जानना बहुत ज़रूरी है क्योंकि हम अपने विरोधी को जब ही शिकस्त दे सकते हैं जब हम उसकी गतिविधियों के बारे में जानते होंगे |

नेशनल एन्दोव्मेंट फॉर डेमोक्रेसी का मुख्य काम है अमरीका की साम्राज्यवादी नीतियों का पुरे विश्व में प्रचार-प्रसार और उनको अमल में लाने के लिए किसी भी देश में लोकतांत्रिक सरकार को अपने गैर सरकारी संगठनों (NGO)  के ज़रिये उखाड़ फेंकना | अमरीकी सरकार द्वारा इसे फंडिंग प्राप्त होती है और इसकी ताकत का अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इस की गतिविधियों पर अमरीकी राष्ट्रपति भी पूरी तरह से रोक नही लगा सकते | नेशनल एन्दोव्मेंट फॉर डेमोक्रेसी के पहले प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने 1991 में खुद ये बात स्वीकार की थी कि जो काम 20 साल पहले सी आई ए करती थी, वो आज उसी काम को आगे बढ़ा रहे हैं |  इसके काम को हम दो घटनाओं से और अच्छी तरह से समझ सकते हैं | पहली घटना है सर्बिया में एक युवा संगठन “ओटपोर” के ज़रिये सर्बियाई राष्ट्रपति स्लोबोडान मिलोसेविक की सरकार का तख्तापलट | खुद नेशनल एन्दोवमेंट फॉर डेमोक्रेसी के कागजों के अनुसार अगस्त 1999 से उसने लगातार “ओटपोर” को आर्थिक सहायत प्रदान करके मिलोसेविक के खिलाफ सर्बिया में प्रदर्शन आयोजित करवाये | स्लोबोडान मिलोसेविक फेडरल रिपब्लिक ऑफ़ यूगोस्लाविया के 1997 से 2000 तक  राष्ट्रपति रहे और जब 1999 में नाटो द्वारा यूगोस्लाविया के ऊपर बमबारी की जा रही थी तो उस समय पर वो ही यूगोस्लाविया के राष्ट्रपति थे | मार्च  24, 1999 से जून 10, 1999 तक नाटो ने यूगोस्लाविया पर भीषण बमबारी की लेकिन फिर भी वो मिलोसेविक को पद से नही हटा पाए | मिलोसेविक अमरीकी नीतियों के धुर विरोधी थे और इसलिए बमबारी के दौरान 1999 मे अमरीकी समर्थित इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने उनके ऊपर युद्ध अपराध के आरोप लगाये और उनके खिलाफ वारंट जारी कर दिया | बमबारी के पूर्ण रूप से सफल न होने पर “ओटपोर” के ज़रिये मिलोसेविक के खिलाफ प्रदर्शन करवाये और  अक्टूबर 7, 2000 को मिलोसेविक ने इस्तीफा दे दिया | इनके बाद अमरीका के सहयोग से राष्ट्रपति  पद पर काबिज़ हुए “वोजिस्लाव कोस्तुनिका” के आदेश पर “मिलोसेविक” को बिना किसी पुख्ता सबूत के गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाये गये लेकिन अदालत में मिलोसेविक के ऊपर लगाये गये सभी आरोप झूठे साबित हुए| “ओटपोर” ने मिलोसेविक की गिरफ़्तारी के लिए अमेरिका से आदेश मिलने के बाद सर्बियाई सरकार पर दबाव बनाया |  

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