कुछ समय से पूरे विश्व को काबू में करने ले लिए एक नये तरीके का इस्तेमाल
साम्राज्यवादियों ताकतों द्वारा किया जा रहा है और वो है लोकतंत्र के नाम पर दूसरे
देशो के आंतरिक मामलो में अमरीका व् पश्चिमो देशों का हस्तक्षेप | 1970 तक सी आई ए उन सभी देशों
में सीधे तख्तापलट करने की
साजिश रचती थी जो अमरीका की नीतियों का विरोध करते थे लेकिन 1970 के दशक में सी आई
ए की ऐसी कई घटनाओं में संलिप्ता दुनिया के सामने उजागर हुई जिन्होंने पूरे अमरीका
को शर्मसार कर दिया | इन घटनाओं में प्रमुख थी वाटरगेट स्कैंडल में सी आई ए की भूमिका,
1953 में ईरान में एक लोकतान्त्रिक सरकार का तख्तापलट, 1960 में सी आई ए के आदेश पर कुछ
माफियाओं द्वारा क्यूबा के राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो को ज़हर देने की कोशिश और
चिली में सी आई ए द्वारा एक लोकतान्त्रिक सरकार के राष्ट्रपति साल्वाडोर अलेंदे की
हत्या | इसके बाद अमरीकी सरकार ने निर्णय लिया कि सी आई ए की ऐसी गतिविधियों पर
रोक लगा दी जाये और उन्होंने इन कामों को अंजाम देने के लिए 1983 में एक नये हथियार के रूप
में एक संगठन बनाया जिसे नाम दिया गया “नेशनल एन्दोवमेंट फॉर डेमोक्रेसी” और इसको
कानून में बदला अमरीकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने | आज के दिन अमरीकी नीतियों का
विरोध करने वालों देशों में अव्यव्स्था फ़ैलाने का ज़िम्मा इसी संगठन के ऊपर है | सी
आई ए के बारे में तो शायद हर कोई जनता है लेकिन इस संगठन के बारे में बहुत ही कम
लोगों ने सुना है और इसी लिए इसके बारे में जानना बहुत ज़रूरी है क्योंकि हम अपने
विरोधी को जब ही शिकस्त दे सकते हैं जब हम उसकी गतिविधियों के बारे में जानते
होंगे |
नेशनल एन्दोव्मेंट फॉर डेमोक्रेसी का मुख्य काम है अमरीका की साम्राज्यवादी
नीतियों का पुरे विश्व में प्रचार-प्रसार और उनको अमल में लाने के लिए किसी भी देश
में लोकतांत्रिक सरकार को अपने गैर सरकारी संगठनों (NGO) के ज़रिये उखाड़ फेंकना | अमरीकी सरकार द्वारा इसे
फंडिंग प्राप्त होती है और इसकी ताकत का अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इस
की गतिविधियों पर अमरीकी राष्ट्रपति भी पूरी तरह से रोक नही लगा सकते | नेशनल
एन्दोव्मेंट फॉर डेमोक्रेसी के पहले प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने 1991 में खुद ये बात स्वीकार की
थी कि जो काम 20 साल पहले सी आई ए करती थी, वो आज उसी काम को आगे बढ़ा रहे
हैं | इसके काम को हम एक
घटना से और अच्छी तरह से समझ सकते हैं | यह घटना है सर्बिया में एक युवा संगठन “ओटपोर” के
ज़रिये सर्बियाई राष्ट्रपति स्लोबोडान मिलोसेविक की सरकार का तख्तापलट | स्लोबोडान
मिलोसेविक फेडरल रिपब्लिक ऑफ़ यूगोस्लाविया के 1997 से 2000 तक राष्ट्रपति रहे और जब 1999 में नाटो द्वारा यूगोस्लाविया
के ऊपर बमबारी की जा रही थी तो उस समय पर वो ही यूगोस्लाविया के राष्ट्रपति थे |
मार्च 24, 1999 से जून 10, 1999 तक नाटो ने यूगोस्लाविया पर
भीषण बमबारी की लेकिन फिर भी वो मिलोसेविक को पद से नही हटा पाए | मिलोसेविक
अमरीकी नीतियों के धुर विरोधी थे और इसलिए उनके मुल्क पर बमबारी की और बमबारी के
दौरान 1999 मे अमरीकी समर्थित इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने उनके ऊपर युद्ध अपराध के आरोप
लगाये और उनके खिलाफ वारंट जारी कर दिया | बमबारी के पूर्ण रूप से सफल न होने पर अमरीका
ने “ओटपोर” के ज़रिये मिलोसेविक के खिलाफ प्रदर्शन करवाये और अक्टूबर 7, 2000 को मिलोसेविक ने इस्तीफा दे
दिया | खुद नेशनल एन्दोवमेंट फॉर डेमोक्रेसी के कागजों के अनुसार
अगस्त 1999 से उसने लगातार “ओटपोर” को आर्थिक सहायत प्रदान करके मिलोसेविक के
खिलाफ सर्बिया में प्रदर्शन आयोजित करवाये | इसके बाद अमरीका के सहयोग से प्रधानमंत्री पद पर काबिज़ हुए
“जोरन द्जिन्द्जिक” के आदेश पर “मिलोसेविक” को बिना किसी पुख्ता सबूत के गिरफ्तार
कर लिया गया और उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाये गये लेकिन अदालत में मिलोसेविक के
ऊपर लगाये गये सभी आरोप झूठे साबित हुए | “ओटपोर” ने मिलोसेविक की गिरफ़्तारी के
लिए अमेरिका से आदेश मिलने के बाद सर्बियाई सरकार पर दबाव बनाया | इस दबाव के कारण
सर्बिया के नये प्रधानमंत्री ने मिलोसेविक को दोबारा गिरफ्तार कर इंटरनेशनल
क्रिमिनल ट्रिब्यूनल के हवाले कर दिया | नीदरलैंड के शहर हेग में स्थापित इस कोर्ट
में जब मुकदमा शुरू हुआ तो मिलोसेविक ने कोई भी वकील लेने से मना कर दिया क्योंकि वे
इस कोर्ट को गैरकानूनी मानते थे क्योंकि यह कोर्ट बिना संयुक्त राष्ट्र की अनुमति
के बनाया गया था | 2006 में जब ये स्पष्ट हो गया कि मिलोसेविक किसी भी तरह से दोषी
नही हैं तो पश्चिमी जासूसी एजेंसियों ने जेल में ही उनको ज़हर देकर मार दिया | 11 मार्च 2006 को अपनी मौत से 3 दिन पहले उन्होंने रूस के
दूतावास को भेजे एक पत्र में लिखा की उनको शक है की उन्हें लगातार ज़हर दिया जा रहा
है | इसके बाद नये सर्बियाई प्रधानमंत्री जोरन द्जिन्द्जिक और “ओटपोर”
ने आर्थिक, न्यायिक, रक्षा और मीडिया सुधारों के नाम पर पुरे देश को अमेरिका के
हवाले कर दिया और इस तरीके से नेशनल एन्दोव्मेंट फॉर डेमोक्रेसी ने अपना एक मिशन
पूरा करते हुए एक और देश को अमरीकी साम्राज्यवादियों का गुलाम बना दिया | इसके बाद
सर्बिया में शुरू हुआ पश्चिमी कॉर्पोरेट जगत द्वारा आम जनता का बेतहाशा शोषण जो आज
तक जारी है |
ऐसे और भी कई संगठन हैं जिनके द्वारा अमरीका दुसरे मुल्कों पर नज़र रखता है और उन
में अव्यवस्था फैलाता है | उनकी चर्चा हम अगले लेख में करेंगे और इनकी गतिविधियों
को और अच्छे तरीके से समझने की कोशिश करेंगे क्योंकि जानकारी ही हमारा सबसे बड़ा
हथियार है |
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