Thursday, 30 July 2015

युवाओं से विशेष बात – नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के साथ

आज जब भारत राष्ट्र संकटों के दौर से गुजर रहा है तो ऐसे में छात्रों और नौजवानो पर एक बड़ी जिम्मेदारी आ पड़ी है कि वे संगठित होकर संकलपित होकर भारत को इस दौर से बाहर निकालें | इतिहास गवाह रहा है की जब जब इस देश की आन-बान-शान पर किसी ने आँख उठाया है तो छात्रों और नौजवानो ने उनका डटकर सामना किया है और विजय प्राप्त की है | इतिहास के पन्नो को पलटने पर एक ऐसा लेख प्राप्त होता है, जिसमें नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा है की, “अगर युवाओं को स्वाभिमानी इंसान के रूप में बने रहना है और एक महान देश के नागरिक के रूप में अपने भावी जीवन की तैयारी करनी है, तो युवाओं को अपना संगठन बनाना चाहिए | संगठन को शारीरिक, बौधिक, तथा नैतिक प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए ताकि युवा व्यक्तिगत तथा सामूहिक रूप से बेहतर मनुष्य तथा बेहतर नागरिक बन सके |
इसी क्रम में नेताजी का 16 मई 1923 को दिया गया भाषण आज के इस दौर में भी प्रासंगिक है, जिससे युवा मन को निश्चित ही सन्देश प्राप्त होगा और उनमें नई उर्जा का सृजन होगा | इस युवा उर्जा की सहायता से हम युवा, भारत में फैले अँधेरे को छांटकर प्रकाश का उदय करने में कामयाब हो पायेंगे |   
“हमारा जनम इस विश्व में एक उद्देश्य की पूर्ती के लिए हुआ है – एक सन्देश के लिए जैसा की सूर्य का उदय विश्व को प्रकाश देने के लिए होता है , जंगल में फूल सुगंध बिखेरने के लिए खिलते हैं, नदियाँ समुद्र कि ओर अपने जल का उपहार लेकर चलती हैं | उसी प्रकार हम भी इस प्रथ्वी पर अपनी युवा शक्ति और आनंद के साथ एक सच की स्थापना के लिए आये हैं | इस अनजान और रहस्यात्मक उद्देश्य, जिससे हमारा यह निरुद्देदश्यपूर्ण जीवन सार्थक हो जाता है, कि हमें खोज करनी चाहिए और इसकी खोज अपने जीवन में किये गए कार्यों से, अनुभव और चिंतन के माध्यम से होनी चाहिए |
तरुणाई के इस तेज प्रवाह ने हमें आनंद के रसस्वादन के योग्य बनाया है क्योंकि हम उस आनंद स्वरुप की अभिव्यक्ति हैं | हम इस पृथ्वी पर आनंद के प्रतीक बनकर विचरण करेंगे | हम अपने अन्तःस्थल में रचे बसे आनंद में निमग्न होकर पूरे जग को आनंदमय कर देंगे | जिस भी दिशा में हम जायेंगे वहां से कष्ट स्वंयमेव समाप्त हो जायेंगे | हमारे जीवनदायक स्पर्श से रोग, दुःख तकलीफ सब दूर हो जायेंगे |
हम इस अश्रपूरित संसार को, इस कष्टपूर्ण जग को आनंद से सरोबार कर देंगे |
हम इस संसार में आशा, उत्सर्ग और नायकत्व की भावना से आये हैं | हम यहाँ नया सृजन करने आये हैं क्योंकि सृजन में ही आनंद है | हम अपने तन, मन, जीवन और बुद्धि को उत्सर्ग कर देंगे | हमारी सब अच्छाई, सत्यता और देवत्व हमारी सृजनशीलता में अभिव्यक्त होंगे | हम आत्मोत्सर्ग से प्राप्त आनंद से पूरी तरह भीगे होंगे और पूरा विश्व हमारे उस आनंद से लाभान्वित हो सकेगा |
जो कुछ भी हम कर सकते हैं उसका कोई अंत नहीं है, जो कुछ भी हम दे सकते हैं उसका भी कोई अंत नहीं है क्योंकि जितना अधिक त्याग हम करेंगे | हमारा जीवन उतने ही अधिक वेग से प्रभावित होगा |
हमारे पास शास्वत आशा, असीमित उत्साह, अतुलित उर्जा तथा अडिग साहस है, इसलिए कोई हमें हमारे पथ से विचलित नहीं कर सकता | हमारे सम्मुख चाहे निराशा और अविस्श्वास की बाधाये ही क्यों न आ जाये |
हमारा अपना एक विशेष धर्म है और हम उसी के सिद्धान्तों का अनुशरण करते हैं | जो कुछ भी नया है, महत्वपूर्ण है और जिसे अभी तक देखा परखा नहीं गया है, हम उसी के हिमायती हैं | हम पुराने में नयापन, चलायमान को स्थायित्व, अपरिपक्व को परिपक्वता तथा अनिश्चितता को निश्चितता प्रदान करते हैं | हम इतिहास द्वारा प्रदत पुराने अनुभवों को ज्यों का त्यों स्वीकार नहीं करते | निस्संदेह हम अमरता के यात्री हैं फिर भी हम अनजान राहों पर चलना पसंद करते हैं क्यूंकि हमे अपरिचित भविष्य के प्रति प्यार है | हमें गलतियाँ करने का अधिकार मिलना चाहिए इसलिए बहुत से लोग हमारे साथ सहानुभूति नहीं रखते | काफी लोगों की नज़रों में हम उपद्रवी हैं |
 लेकिन इसी में हमारा आनंद निहित है और इसी में हमारा गौरव | युवा मन सब जगह और सदा ही उपद्रवी और हठी होता है | जब हमारी  इच्छाएं पूरी नहीं होती तब हम अथक रूप से आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं और उस समय हमें कोई उपदेश सुनने की फुर्सत नहीं होती | हम गलतियाँ करते हैं, भूलों के भवंरजाल में फंसते हैं, ठोकर खाते हैं, लेकिन कभी भी हम अपना उत्साह नहीं छोड़ते और पीछे मुड़कर नहीं देखते | जो हम अशांती और उपद्रव उत्पन्न करते हैं उसका कोई अंत नहीं है | क्योंकि हम सदा ही गतिशील हैं |
यह हम ही हैं जो देश-देश में स्वतंत्रता का इतिहास लखते हैं | हम यहाँ पर शांति का मरहम नहीं लगाने आये हैं | हम यहाँ संघर्ष का सन्देश देने, एक नई क्रांति को जन्म देने तथा एक उथल पुथल मचाने आये हैं |
हम अपने शारीरिक और मानसिक शक्ति के गठजोड़ से कैसे कैसे आश्चर्य कर सकते हैं इसके लिए बेबिलोनिया, फौनेसिया, असीरिया, मिश्र, ग्रीक, रोम, टर्की, इंग्लैंड, फ़्रांस, जर्मनी, रूस, चीन, जापान, तथा हिन्दुस्तान या कोई भी अन्य देश हो इनका इतिहास पढ़ना होगा | इनके इतिहास के प्रत्येक पृष्ठ पर हम युवाओं की उपलब्धियों की गाथा स्वर्ण अक्षरों में अंकित मिलेगी | सभी सम्राट अपनी अपनी गद्दी छोड़ने को विवश हैं क्योंकि उसे हमने इसका संकेत दिया है | एक ओर हमने ताजमहल का निर्माण किया है जो पत्थरों में तलाशा गया है, असीम प्रेम का प्रतीक है, और दूसरी ओर हमने इस प्रथ्वी को रक्त रंजित भी किया है  | अपनी संगठित शक्ति से हमने समाज, राज, साहित्य, कला, और विज्ञान का निर्माण अनेक युगों में विभिन्न देशों में किया है और जब हमने रौद्र ( विध्वंशक ) रूप धारण किया और हमने विनाश लीला प्रारंभ की तो अनेक समाज और साम्राज्य धूल-धूसरित हो गए |
अनेक युगों के बाद हमे अपनी शक्ति का आभास हुआ | हम यह पह्चान करने योग्य हुए कि हमारा धर्म क्या है  ? अब किसमें साहस है की जो हमारा शोषण कर सके या हमारे ऊपर अपना आधिपत्य जामा सके | इस नई जागृति के बीच यह सबसे बड़ी उपलब्धि है कि युवा शक्ति अपनी उपस्तिथि का भान करा चूकी है |
यौवन की वह सोयी हुई शक्ति जीवन के हर छेत्र में देदीप्यमान है और यौवन की यह गौरवपूर्ण लालिमा और अधिक दिव्य होकर चमकेगी | युवा आन्दोलन सर्वव्यापी है, क्योंकि शाश्वत है | आज विश्व के हर देश में, विशेष रूप से जहाँ जहाँ पुरानेपन की, बुढ़ापे की काली छाया फैलती जा रही है वहां वहां युवा आगे बढ़ रहे हैं और द्रढ़ निश्चिय के साथ बागडोर संभाल रहे हैं | कौन इस बात को कह सकता कि किस दिव्य रौशनी से संसार चमकेगा ?

ए मेरे नवजीवन के युवा प्राणदाता जागो, उठो, उषा की लालिमा आसमान में दिखाई देने लगी है | 

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