माननीय सांसद
अभिवादन |
हमारे लिए यह सुखद विषय है की आपको
भूमि – अधिग्रहण बिल पर विचार करने के लिए सिलेक्ट कमेटी में रखा गया है | हमें
आशा है की आप भारतीय परम्परा, इतिहास और संस्कृति के अंतर्गत किसानो के साथ भूमि
के रिश्ते से एवम् समस्त देशवासियों के अपने मात्रभूमि के प्रेम के रिश्ते से अवगत
होंगे | हमारी परम्परा के अनुसार भूमि हमारी माँ के समान होती है और इसको बेचा
नहीं जा सकता | अंग्रेजों के आने के बाद देश में ज़मीन की खरीद – फरोख्त का सिलसिला
शुरू किया गया | जिससे पूर्व उनके द्वारा भारतीय गाँव की स्वावलंबित अर्थव्यवस्था
को तोड़कर किसानो को कंगाल बना दिया गया | स्वतंत्र भारत में आज जब भूमि के सवाल पर
पुनः चर्चा का वातावरण बना है तथा हम और आप यह भी जानते हैं कि भारत में ज़मीन को
खरीद फरोख्त की वस्तु बनाने वाले अंग्रेजों ने अपने देश (इंग्लॅण्ड ) के किसानो से
उद्योगों के लिए ज़मीन लीज़ यानि किराये पर ली | इतना ही नहीं किराये के अलावा उन्हें
उद्योग के मुनाफे में से लाभांश देने की परम्परा भी बनाई | फिर हमारे देश की ज़मीन
को खरीदने की इच्छा उनकी मल्टीनेशनल कम्पनियों को क्यूँ है ?
निश्चित ही भारत का भविष्य इस
प्रमुख प्रश्न से जुडा हुआ है | अगर हम देशभक्त हैं, तो हमें नए ढंग से सोचना होगा
और अपनी परम्पराओं पर भी विचार करना होगा | हमें अपेक्षा है की आप जैसे विद्युत जन
इस समबंध में देश के भविष्य को समृद्धशाली
बनाने के लिए अपना निर्णय करेंगे | समृद्ध किसान ही समृद्ध भारत के निर्माण
का आधार है | अतः उनकी आवश्यकता अनुसार अब ऐसा कानून बनना चाहिए जिसमें ज़मीन उनकी
व ग्राम समाज की अनुमति से केवल लीज पर लेने की अनुमति हो और ज़मीन धारक को किराए
के आलावा मुनाफे से हिस्सा मिल सके | ग्राम समाज को भी मुनाफे का एक हिस्सा
सामाजिक कार्य हेतू मिलने का प्रावधान होना चाहिए |
माननीय, युवा क्रान्ति देशभक्त
नोजवानो का संगठन है और देशहितार्थ आपसे ये उम्मीद रखता है की आपका फैसला देशहित
में हो |
जय हिन्द |
युवा
क्रान्ति
No comments:
Post a Comment