Monday, 15 June 2015

संसदीय समिति को दिया गया सुझाव पत्र

 lsok esa]                                                      fnukad% 15 twu 2015
la;qDr lfpo ¼,l,y½
yksdlHkk lfpoky;
dejk ua0 336] rhljh eafty] laln Hkou (Annexe)
ubZ fnYyh7110001

fo’k; % Hkwfe  fo/ks;d&2015 ds lanHkZ esa fdlku vkUnksyu dk jk"Vªh; leUo; (NAFM) ds }kjk fn, tk jgs lq>koksa dks 'kkfey djus vkSj lacf/kr la;qDr lalnh; lfefr ds le{k fdlku vkUnksyu dk jk"Vªh; leUo; (NAFM) ls tqM+s ns'kHkj ds fdlku laxBuksa ds izfrfuf/k;ksa dks viuk i{k j[kus dk volj iznku djus gsrq i=A
      हम अपने मत को संछिप्त रूप में रखते हुए कहना चाहते हैं कि ------
(1)    भारत में भूमि परम्परागत रूप से कभी भी क्रय - विक्रय की वस्तु नहीं रही है, इसलिए भारत में सदा भूमि को भारतमाता के रूप में माना जाता रहा है | सर्वप्रथम अंग्रेजों ने इसे क्रय - विक्रय की वस्तु बनाया |  भूमि अधिग्रहण बिल उसी नीति का परिणाम है | जबकि अंग्रेजों के देश में किसानो से भूमि को आवश्यकता पड़ने पर लीज पर लिया जाता है | इसमें उनका मालिकाना हक़ बरकरार रहता है |
(2)    भूमि अधिग्रहण अध्यादेश की पुनर्रचना इस प्रकार की जाये की किसानो से ज़मीन लीज पर ली जाये और मुनाफे का लाभांश उन्हें दिया जाये |
(3)    ग्राम समाज ग्रामीण भूमि का संरक्षक होना चाहिए | अतः उसकी स्वीकृति के बिना गाँव की ज़मीन अधिग्रहित नहीं की जानी चाहिए |
(4)    देश में जितनी भी जमीन अधिग्रहित की गई है अगर उसमें नया कार्य नहीं हुआ है जिसके लिए ज़मीन अधिग्रहित की गई है तो यह ज़मीन किसानो को अविलम्ब वापिस दिलाई जाये | उदाहरण – यूपी के जिला मुरादाबाद में यूपी सरकार ने ओद्योगिक छेत्र के रूप में सेज (SEZ) का निर्माण २००७ में किया | जहाँ अभी तक कोई उद्योग नहीं लगा है | इसी तरह नेपा पेपर मिल द्वारा 1991 में २० वर्ष पहले भूमि अधिग्रहित की गई  थी जहाँ अभी तक पेपर मिल नहीं लगा है |
(5)    राष्ट्र के विकास हेतु कृषि स्वावलंबन और कृषि कार्य में लोगों का समायोजन अति आवश्यक है अतः खेती योग्य ज़मीन एवं कृषि कार्य में लगे किसानो की ज़मीन का कभी अधिग्रहण ना किये जाने का कानून बनाना चाहिए |


आशा है कि आप  देश के हित में इन बिदुओं पर गौर करेंगे और देश को स्वतंत्र व स्वावलंबी बनाये रखने में मदद करेंगे | विस्तृत पत्र साथ में संलगन है |

No comments:

Post a Comment