Saturday, 7 February 2015

संकल्प यात्रा – गाँधी के सपनों का भारत

संकल्प यात्रा – गाँधी के सपनों का भारत

30 जनवरी 2015, “माहत्मा गांधी के शहादत दिवस के अवसर पर” प्रातः 11 बजे भगतसिंह पार्क निकट आई. टी. ओ. पर देश भर से आए हुए किसान संगठनों के प्रतिनिधी, सामाजिक कार्यकर्ता, युवाक्रांती के नौजवान एकत्रित हुए जिनके हाथो मे भूमि अध्यादेश 2014 को समाप्त करो कि तख्तियां थी और कुछ के हाथों में ग्राम स्वराज लाओ देश बचाओ की तख्तियां थी |
ये सभी लोग आज पार्क मे एकत्रित होकर पदयात्रा करते हुए राजघाट जाने वाले थे कुछ कार्यकर्ता बाहर से आने थे तथा उनके इंतजार के वक्त पार्क मे सभा प्रारम्भ की गई | पार्क मे लगी भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु की मूर्तियों पर माल्यार्पण करने के बाद युवाक्रान्ति के सह-संयोजक हिमांशु के संचालन मे सभा प्रारम्भ की गई | सभा मे किसान नेता वी.एम.सिंह ने किसानो कि लूट का वर्णन करते हुए उसके विरुद्ध अपने कानूनी संघर्ष के संस्मरण बताए, और भूमि अध्यादेश को किसानों की समाप्ति कि उद्घोषणा बताया | समाजिक कार्यकर्ता श्रीमती अरुणा राय ने देश मे अधिगृहित जमीनों के कारण अपने गाँवो से बेदखल होने वाले किसानों की पुर्नवास समस्या का वर्णन किया और समझाया कि उक्त अध्यादेश के बाद तो किसानों कि और अधिक दुर्दशा हो जाएगी इस अवसर पर उपस्थित अपना समर्थन व्यक्त करने आए योगेंद्र यादव ने कहा की ये सरकार किसान विरोधी है और इसके राज मे किसानों की दुर्दशा अगर रोकनी है तो भूमि अध्यादेश के खिलाफ देशव्यापी संघर्ष खङा करना होगा | यह मुद्दा दल और संगठनों से उपर देश बचाने का है | डाँ राकेश रफीक ने कहा कि देश के नौजवान और किसान की एकजुटता मोदी सरकार के इस कदम पे उसे शिकस्त दे सकती है | हमें छोटे मोटे मतभेदों से उपर उठकर कार्य करना होगा | इस अवसर पर सी.पी.आई.ऍम.एल. की कविता कृष्णन, शेतकरी संगठन  के प्रतिनिधि, भारतीय किसान युनियन के हरपाल सिंह,
भारतीय भाषा अभियान के श्याम रूद्र पाठक, यू पी के राज्यमंत्री राकेश मौर्य सहित लगभग 500 युवा साथी और किसान भाई शामिल थे |
1 बजे शांती मार्च प्रारम्भ हुआ, कतार बद्ध सत्याग्रहियों का 1 मील का लम्बा काफिला भगत सिंह पार्क से राजघाट की ओर बढा | राजघाट पहुँचकर माहत्मा गाँधी की समाधी पर 15 मिनट का मौन रखा, उसके उपरांत गांधी के ग्राम स्वाराज के सपने को पूरा करने के लिए एक संकल्प पत्र द्वारा सभी लोगो ने बोलकर संकल्प लिया |
इसके बाद समाधि स्थल से बाहर निकलकर ट्रेन के कारण देरी से पहुँची मेधा पाठकर ने सभी सत्याग्राहियों को संबोधित करते हुए कहा इस वक्त सारे भारत के गाँव के समक्ष उक्त अध्यादेश एक चुनोती लेकर प्रस्तुत हुआ है हम सभी को संकल्पबद्ध होकर तन-मन-धन से देश के गाँवों को बचाने की लङाई लङनी है | अंत में सभी ने 24 फरवरी को जंतर मंतर पर एकात्रित होने के लिए अपने अपने क्षेत्रो मे प्रचार व व्यवस्था का दायित्व लिया |





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